BS4 और BS6 Engine में क्या अंतर है?

BS4 और BS6 इंजन दो अलग प्रदूषण नियंत्रण मानक हैं जो भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में प्रयुक्त होते हैं। BS4 (भारतीय प्रदूषण मानक – 4) और BS6 (भारतीय प्रदूषण मानक – 6) इंजनों में मानक और प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों में विशेष अंतर होता है।

BS6 मानक के अनुसार इंजनों के प्रदूषण स्तर को काफी न्यूनतम करना चाहिए और नवीनतम प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आवश्यकता होती है। इस लेख में हम BS4 और BS6 इंजन के बीच मुख्य अंतरों को विस्तार से देखेंगे जो प्रदूषण कमी, तकनीकी उन्नति, ईंधन की तकनीक, और उत्पादन प्रक्रिया के प्रति प्रभावित करते हैं।

BS4 और BS6 Engine में क्या अंतर है?

BS4 (Bharat Stage 4) और BS6 (Bharat Stage 6) दोनों भारतीय गैस विज्ञान निगम (Bharat Petroleum Corporation Limited) द्वारा निर्धारित पारिस्थितिकीय मानक हैं जो भारत में गाड़ियों के इंजनों के लिए उपयोग होते हैं। ये मानक इंजन के पारिस्थितिकीय प्रदर्शन को निर्धारित करते हैं जिससे वायु प्रदूषण को कम किया जा सके।

BS4 और BS6 इंजनों के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:

  1. पारिस्थितिकीय मानक: BS4 इंजन पारिस्थितिकीय मानक भारतीय प्रशासनिक मानदंडों के अनुसार निर्धारित किए गए हैं। यहांतक कि BS6 इंजन और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों को अधिक उच्च स्तर पर पूरा करते हैं।
  2. प्रदूषण के स्तर: BS6 इंजन परिसंचारित गैसों (ऑक्सीजन निरंक्ष इमारतों और इंडस्ट्रीज के लिए उपयोग होने वाली गैस जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड और वायु में प्रदूषण करने वाले उच्चारित पदार्थों की निर्मित गैसों का उदाहरण है) के प्रदूषण को अधिक सक्रिय रूप से कम करने में सक्षम होते हैं।
  3. इंजन की प्रौद्योगिकी: BS6 इंजन तकनीकी और मशीनीकरण में एक उन्नततर स्तर को प्रदान करते हैं। इनमें एडवांस इंजन मैनेजमेंट सिस्टम, डायरेक्ट इंजेक्शन, टर्बोचार्जिंग, पांचवा और छठवां पीढ़ी के OBD (On-Board Diagnostics) सिस्टम, पीईटी (पेट्रोल ईंधन टेबल) इंजेक्शन, और एडीब्लू (AdBlue) उपकरण शामिल हैं। ये तकनीकी उपयोग से इंजन की कार्बन उत्सर्जन क्षमता और प्रदर्शन में सुधार होता है।
  4. पेट्रोल और डीजल इंजन: BS6 मानक दोनों पेट्रोल और डीजल इंजनों के लिए होते हैं। BS4 इंजन पहले पेट्रोल इंजनों के लिए ही थे।

BS6 इंजनों के आने से, गाड़ियों का प्रदूषण कम हो गया है और साथ ही ग्राहकों को और उच्च प्रदर्शन और अधिक इंजन अधिकारीता की सुविधा प्राप्त होती है। यह भारतीय सरकार द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

BS Norms क्या है?

BS Norms (Bharat Stage Norms) एक परिसंचारित गैस प्रदूषण नियंत्रण मानक हैं जो भारतीय प्रशासनिक मानदंडों द्वारा निर्धारित किए गए हैं। ये मानक गाड़ी के इंजन के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू होते हैं और वायु प्रदूषण को कम करने का उद्देश्य रखते हैं।

ये मानक गाड़ी के इंजन के ईंधन प्रभावित करते हैं और विभिन्न परिस्थितियों में उपयोग होने वाले इंजनों के प्रदर्शन को निर्धारित करते हैं। इसका प्रमुख लक्ष्य वायु प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर रखना है और वाहनों के प्रदर्शन को सुधारना है।

भारत में अब तक पारित हुए BS Norms की कुछ प्रमुख चरण हैं:

  1. Bharat Stage 1 (BS1): 2000 में लागू हुआ।
  2. Bharat Stage 2 (BS2): 2001 में लागू हुआ।
  3. Bharat Stage 3 (BS3): 2005 में लागू हुआ।
  4. Bharat Stage 4 (BS4): 2010 में लागू हुआ।
  5. Bharat Stage 5 (BS5): यह मानक अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है और BS6 के साथ मेल खाता है।
  6. Bharat Stage 6 (BS6): 2020 में लागू हुआ।

प्रत्येक चरण में, नए और प्रदूषण नियंत्रित इंजन तकनीक विकसित की जाती है जो पूर्व चरण के मानकों की तुलना में प्रदूषण को कम करने में सक्षम होती है। BS6 इंजन मानकों में वायु प्रदूषण को न्यूनतम करने के लिए अधिक उन्नत और उच्च प्रदर्शन तकनीक शामिल हैं। ये मानक भारतीय सरकार द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने और स्वच्छता में सुधार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

Bharat Emmission Standards क्या है?

Bharat Emission Standards (भारत उत्सर्जन मानक) भारत सरकार द्वारा निर्धारित परिसंचारित गैस प्रदूषण मानक हैं जो भारतीय वाहनों के इंजनों के लिए लागू होते हैं। ये मानक वाहनों के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तकनीकी परिमाणों को निर्धारित करते हैं और वायु प्रदूषण को कम करने का उद्देश्य रखते हैं।

भारत में अब तक पारित हुए Bharat Emission Standards (Bharat Stage Norms) के प्रमुख चरण हैं:

  1. Bharat Stage 1 (BS1): 2000 में लागू हुआ।
  2. Bharat Stage 2 (BS2): 2001 में लागू हुआ।
  3. Bharat Stage 3 (BS3): 2005 में लागू हुआ।
  4. Bharat Stage 4 (BS4): 2010 में लागू हुआ।
  5. Bharat Stage 5 (BS5): यह मानक अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है और BS6 के साथ मेल खाता है।
  6. Bharat Stage 6 (BS6): 2020 में लागू हुआ।

प्रत्येक चरण में, नए और प्रदूषण नियंत्रित इंजन तकनीक विकसित की जाती है जो पूर्व चरण के मानकों की तुलना में प्रदूषण को कम करने में सक्षम होती हैं। BS6 मानक वायु प्रदूषण को न्यूनतम करने के लिए अधिक उन्नत और उच्च प्रदर्शन तकनीक शामिल हैं। भारतीय सरकार द्वारा ये मानक वायु प्रदूषण को कम करने और स्वच्छता में सुधार करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

Difference in BS-IV and BS-VI standards

Petrol Emission Norms (All figures in g/km)

Emission NormCOHCNOxHC+NOxPM
BS-III2.300.200.15
BS-IV1.000.100.08
Euro 61.000.100.060.005

Diesel Emission Norms (All figures in g/km)

Emission NormCOHCNOxHC+NOxPM
BS-III0.640.500.560.05
BS-IV0.500.250.300.025
Euro 60.500.060.170.005

BS-IV (भारत स्टेज 4) और BS-VI (भारत स्टेज 6) मानकों में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। यहां हिंदी में उन अंतरों की विस्तृत जानकारी है:

  1. प्रदूषण की मात्रा: BS-IV मानक में वाहनों की प्रदूषण की मात्रा पहले के मानकों की तुलना में कम होती है। BS-VI मानक में इंजनों के प्रदूषण स्तर को और भी न्यूनतम किया गया है। यह वायु प्रदूषण को और अधिक कम करने का उद्देश्य रखता है।
  2. ईंधन की तकनीक: BS-IV मानक ईंधन की पांचवीं पीढ़ी का उपयोग करते हैं, जबकि BS-VI मानक ईंधन की छठवीं पीढ़ी का उपयोग करते हैं। BS-VI मानक में इंजनों में नवीनतम प्रौद्योगिकी शामिल है जैसे कि डायरेक्ट इंजेक्शन, टर्बोचार्जिंग, पेट्रोल ईंधन टेबल (पीईटी), और एडीब्लू (AdBlue) इस्तेमाल करने के लिए उपकरण।
  3. प्रदर्शन और अधिकारिता: BS-VI मानक इंजनों में प्रदर्शन और अधिकारिता में सुधार होता है। इनमें पहले से अधिक इंजन में प्रदर्शन की क्षमता, तेजी, शक्ति, और टॉर्क होती है। इसके अलावा, BS-VI इंजनों की अधिकारिता भी बेहतर होती है, जिससे वाहनों की दिनचर्या परिवहन की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलती है।
  4. तकनीकी परिवर्तन: BS-IV से BS-VI मानक में, वाहनों के इंजन में कई तकनीकी परिवर्तन किए गए हैं। इसमें एडीब्लू (AdBlue) इंजेक्शन सिस्टम, सेलेक्टिव कैटलिस्ट रिडक्शन (SCR) टेक्नोलॉजी, पाइप कंवर्टर, नए इंजेक्शन सिस्टम, एक्सहॉस्ट गैस रीसर्क्यूलेशन (EGR) सिस्टम, और इंजेक्शन टाइमिंग में सुधार शामिल है।

ये थे BS-IV और BS-VI मानकों में मुख्य अंतर। BS-VI मानक वाहन प्रदूषण को न्यूनतम करने के लिए अधिक उन्नत तकनीक और उपकरणों का उपयोग करते हैं और भारतीय सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से लागू किए जाते हैं।

BS6 की वजह से क्या बदलाव आने वाले हैं

BS6 के लागू होने से कई महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। यहां कुछ मुख्य बदलावों की सूची है:

  1. प्रदूषण कमी: BS6 मानक में इंजनों की प्रदूषण कमी की ज्यादा नियंत्रण होता है। नवीनतम प्रौद्योगिकी और उपकरणों का उपयोग करके वाहनों के इंजन प्रदूषण को काफी हद तक कम करते हैं। इससे वायु प्रदूषण की मात्रा में सुधार होता है और हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है।
  2. ईंधन की तकनीक: BS6 मानक में वाहनों में नवीनतम ईंधन प्रबंधन तकनीक शामिल होती है। इसमें पेट्रोल इंजेक्शन टेबल (पीईटी), डायरेक्ट इंजेक्शन, टर्बोचार्जिंग, एडीब्लू (AdBlue) इंजेक्शन सिस्टम, और सेलेक्टिव कैटलिस्ट रिडक्शन (SCR) टेक्नोलॉजी शामिल होती है। ये तकनीकी सुधार इंजन कार्बन एमिशन को कम करने में मदद करती है।
  3. प्रदर्शन में सुधार: BS6 इंजनों में प्रदर्शन में भी सुधार होता है। इनमें पहले से अधिक शक्ति, टॉर्क, तेजी, और एकसाथ प्रदर्शन की क्षमता होती है। इसके साथ ही, बेहतर इंजन ट्रेस्ट (Engine Trust) के कारण वाहनों का अधिकारिता और सुरक्षा भी बढ़ता है।
  4. तकनीकी परिवर्तन: BS6 मानक में वाहनों के इंजन में कई तकनीकी परिवर्तन हुए हैं। इसमें नए इंजेक्शन सिस्टम, पाइप कंवर्टर, एक्सहॉस्ट गैस रीसर्क्यूलेशन (EGR) सिस्टम, और इंजेक्शन टाइमिंग में सुधार शामिल हैं। इन परिवर्तनों के माध्यम से, इंजन कार्बन एमिशन को कम करने में सहायता मिलती है और वाहनों का प्रदर्शन और अधिकारिता बेहतर होती है।

ये थे कुछ मुख्य बदलाव जो BS6 मानक के लागू होने से हो रहे हैं। BS6 मानक वाहनों के इंजन प्रदूषण को कम करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं और इससे हवा की गुणवत्ता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

BS6 Norms का हमारे Indian Automobile Industry में क्या effect पड़ता है :-

BS6 नार्म्स के लागू होने से भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग पर कई प्रभाव पड़ते हैं। यहां कुछ मुख्य प्रभाव हैं:

  1. तकनीकी उन्नति: BS6 नार्म्स के लागू होने के लिए उद्योग को इंजनों के डिजाइन और तकनीक में महत्वपूर्ण उन्नति करनी पड़ती है। इससे उत्पादन में तकनीकी सुधार होता है और नवीनतम इंजन प्रौद्योगिकी और तकनीक का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।
  2. प्रदूषण कमी: BS6 नार्म्स के अनुसार, वाहनों के इंजनों के प्रदूषण स्तर को काफी न्यूनतम करना चाहिए। इससे वायु प्रदूषण कम होता है और हवा की गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके लिए उद्योग को प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता होती है।
  3. तकनीकी में खर्च: BS6 नार्म्स के लागू होने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव करने के लिए काफी खर्च करना पड़ता है। इसमें इंजन तकनीक को अपग्रेड करने, इंजन टेस्टिंग उपकरण को अद्यतन करने, और प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों को लागू करने जैसे विभिन्न तकनीकी बदलाव शामिल हो सकते हैं।

Conclusion

BS4 और BS6 इंजन दोनों में महत्वपूर्ण अंतर हैं। BS6 मानक के लागू होने से प्रदूषण नियंत्रण में सुधार होता है और हवा की गुणवत्ता में सुधार आता है। इसके साथ ही, इंजनों की तकनीकी उन्नति, ईंधन प्रबंधन तकनीक, और उत्पादन प्रक्रिया में बदलाव होता है।

यह प्रदूषण को कम करने के साथ साथ वाहनों के प्रदर्शन, अधिकारिता, और सुरक्षा में भी सुधार प्रदान करता है। BS6 नार्म्स के लागू होने से भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में उन्नति और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलता है।

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